कंस का भगवान कृष्ण के प्रति शत्रुता
विवाह के बाद अपनी चचेरी बहन देवकी और उनके पति वसुदेव को पहुँचाने जाते समय रास्ते में कंस को संबोधित करते हुए आकाशवाणी हुई “अरे मूर्ख, जिसको तू रथ मे बैठा कर लिए जा रहा है, उसकी आठवें गर्भ की संतान तुझे मार डालेगी।”
यह आकाशवाणी सुनते ही कंस ने अपनी तलवार निकाल लिया और देवकी को मारने के
लिए उद्दत हो गया। नवविवाहिता देवकी के पति वसुदेव ने देवकी की रक्षा के लिए अनेक
तरह से कंस को समझाया। लेकिन वह देवकी को मारने के अपने हठ पर अड़ा रहा। कोई और
उपाय नहीं देख कर देवकी की तत्काल मृत्यु रोकने के लिए वसुदेवजी ने कंस से कहा कि
वे देवकी के पुत्रों को लाकर कंस को दे देंगे क्योंकि कंस को खतरा देवकी से नहीं
बल्कि उसके पुत्र से है।
कंस जानता था कि वसुदेव सत्यवादी थे और अपने वचन को जरूर पूरा करते । साथ ही उनकी बातें भी तर्कसंगत थी। इसलिए वह देवकी को इस शर्त पर जीवित छोड़ने के लिए राजी हुआ कि वसुदेव उसके पुत्रों को पैदा होते ही लाकर उसे देते।
इस तरह तत्काल देवकी की जान बच गई। देवकी और वसुदेव दोनों पति-पत्नी अपने
घर आ गए। समय आने पर देवकी ने पुत्र को जन्म दिया। उसका नाम रखा गया कीर्तिमान।
अपने वचन का पालन करते हुए वसुदेव जी ने उसे लाकर कंस को दे दिया। उनकी यह
सत्यनिष्ठा देख कर कंस बड़ा प्रसन्न हुआ। उसने वसुदेव जी से उस नन्हें से सुकुमार
बालक को ले जाने के लिए कहा क्योंकि आकाशवाणी के अनुसार उसे देवकी के केवल आठवें
पुत्र से खतरा था अन्य पुत्रों से नहीं।
वसुदेवजी प्रसन्न होकर पुत्र को लेकर लौट आए। लेकिन देवता चाहते थे कि कंस इतना
घोर पाप करे कि भगवान के लिए वह असह्य हो जाय। इसलिए देवर्षि नारद ने कंस को बता
दिया कि ब्रज भूमि में रहने वाले नन्द आदि गोप, यदुवंश, वृष्णि वंश आदि मे उत्पन्न सभी नर-नारी
देवता है। उन्होंने यह भी बताया कि देवताओं द्वारा उसके और दैत्यों के वध की
तैयारी की जा रही है।
नारद जी के बातों से कंस को विश्वास हो गया कि यदुवंशी देवता हैं और देवकी
के गर्भ से भगवान विष्णु ही उसका वध करने के लिए जन्म लेने वाले हैं। उसे अपने
पूर्व जन्म की याद आई जब भगवान विष्णु ने उसे मार डाला था। अतः उनके जाने के बाद
उसने देवकी और वसुदेव को हथकड़ी और बेड़ियों से जकड़ कर कैद में डाल दिया। उसने उनके
पहले पुत्र (जिसे उसने पहले जीवित छोड़ दिया था) और इसके बाद होने वाले सभी पुत्रों
को मार डाला।
इतना ही नहीं कंस ने समस्त यदुवंशियों को अपना कट्टर शत्रु मान लिया। अपने
मित्रों की सहायता से वह यदुवंशियों को खत्म करने लगा। भयभीत हो कर यदु वंश के लोग
अपनी जान बचाने के लिए भारतवर्ष के अन्य राज्यों (देशों) मे जाकर बसने लगे। इन
राज्यों मे प्रमुख थे– कुरु, पांचाल, केक, शाल्व, विदर्भ, निषध, विदेह, कोशल
इत्यादि।
इधर कंस ने क्रमशः देवकी के छः पुत्रों को मार डाला।
सातवें पुत्र के रूप मे उनके गर्भ मे आए भगवान के अंशस्वरूप श्री शेष जी। कंस के
भय से वसुदेव की पहली पत्नी रोहिणी गोकुल में नन्द जी के यहाँ छुप कर रह रही थी।
भगवान के आदेश से योगमाया ने श्री शेष जी को देवकी की गर्भ से निकाल कर रोहिणी के
गर्भ में स्थापित कर दिया। देवकी का गर्भ समाप्त होने के कारण लोगों ने समझा कि
उनका गर्भपात हो गया है।
अंततः वह समय आया जब भगवान स्वयं देवकी के गर्भ मे आए। भगवान के गर्भ मे
आते ही देवकी के शरीर में एक दिव्य कांति आ गया। यह देख कर कंस को विश्वास हो गया
कि इस बार देवकी के गर्भ में विष्णु ने ही प्रवेश किया है। लेकिन उसने एक गर्भवती
स्त्री, जो कि उसकी बहन थी, का वध
करना उचित नहीं समझा। अतः वह इस बालक के जन्म की प्रतीक्षा करने लगा।

Comments
Post a Comment